23 May 2018 BK murli today in Hindi - Aaj ki Murli

22 May 2018

Brahma Kumaris murli today in Hindi - Aaj ki Murli - BapDada - madhuban - 

23-05-2018 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन

 

"मीठे बच्चे - शिवबाबा निष्काम नम्बरवन ट्रस्टी है, उसे तुम अपना पुराना बैग-बैगेज ट्रान्सफर कर दो तो सतयुग में तुम्हें सब नया मिल जायेगा"

 

प्रश्नः-

बाप को किन बच्चों की हर प्रकार से सम्भाल करनी पड़ती है?

उत्तर:-

जो निश्चयबुद्धि बन अपना पूरा-पूरा समाचार बाप को देते हैं, बाप से हर कदम पर डायरेक्शन लेते हैं - ऐसे बच्चों का बाप को बहुत ख्याल रहता है। बाबा कहते - मीठे बच्चे, कभी भी श्रीमत में संशय नहीं आना चाहिए। संशय में आया तो माया बहुत नुकसान कर देगी। तुम्हें लायक बनने नहीं देगी।

 

गीत:-

दर पर आये हैं....  

 

ओम् शान्ति।

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों ने गीत सुना। बच्चे उनको कहा जाता है जो बाप के बनते हैं। बाप ने समझाया है - यह अन्तिम मरजीवा जन्म, जीते जी बाप का बनना है। यह तो बच्चे जानते हैं, श्रीमत गाई हुई है। श्रीमद् भगवानुवाच। उस गीता में कृष्ण का नाम डाल दिया है। परन्तु पहले शिवबाबा, फिर ब्रह्मा, फिर कृष्ण। तो श्रीमत कृष्ण की नहीं कहेंगे, वह दैवी गुणों वाला मनुष्य है। मनुष्य को पतित-पावन नहीं कहा जाता। पतितों को पावन बनाने वाला एक ही बाप है, जिसकी श्रीमत पर तुम चल रहे हो। निराकार परमात्मा सभी धर्म वालों का पिता है। कृष्ण को सभी नहीं मानेंगे। क्रिश्चियन, क्राइस्ट को फादर मानते हैं, न कि कृष्ण को क्योंकि क्रिश्चियन हैं क्राइस्ट की मुख वंशावली।

शिवबाबा आकर तुमको अपना बनाते हैं। कहते हैं - सिर हथेली पर रखकर बाप का बने हैं - उनके डायरेक्शन पर चलने के लिए। बच्चों को उन्हें मत देने की दरकार नहीं है। वह खुद मत देने वाला है। ऐसे नहीं, यह क्यों कहते? नहीं, यह तो सब बच्चे हैं। शिवबाबा नामीग्रामी है। वह जो मत देंगे, जो कुछ करेंगे, राइट करेंगे। इस साकार (ब्रह्मा) से भी जो कुछ करायेंगे वह राइट ही होगा क्योंकि करनकरावनहार है। उनको भी यह मत देते हैं कि यह करो। तुम्हारा कनेक्शन है शिवबाबा से। कोई का भी अवगुण नहीं देखना है, श्रीमत पर चलना है। शिवबाबा तो है निराकार, साक्षी। उनका यहाँ घर है नहीं। तुम यहाँ पराये घर में रहते हो। फिर स्वर्ग में जाकर अपने घर में रहेंगे। शिवबाबा कहते हैं - मैं तो नहीं रहूँगा। मैं तो संगम पर थोड़े टाइम के लिए आता हूँ।

तुम हो सच्चे-सच्चे रूहानी सैलवेशन आर्मी। सुप्रीम बाप डायरेक्शन दे रहे हैं, हूबहू कल्प पहले मुआफिक। कल्प पहले जो डायरेक्शन दिये होंगे वही देंगे। दिन-रात गुह्य ते गुह्य बातें सुनाते रहते हैं। नया कोई समझ न सके। कराची से लेकर मुरली चलती आई है। पहले बाबा मुरली नहीं चलाते थे। रात दो बजे उठकर 10-15 पेज लिखते थे। शिवबाबा लिखवाते थे, फिर उसकी कापियाँ निकालते थे। भक्ति मार्ग के तो बड़े-बड़े किताब बनाते जाते हैं। वह फिर रखते हैं। तुम कितना रखेंगे क्योंकि जानते हैं यह सब विनाश होना है। चित्र आदि भी थोड़े समय के लिए हैं फिर यह दब जायेंगे। वहाँ न शास्त्र, न चित्र रहेंगे। फिर यह जो कुछ चल रहा है, कल्प बाद फिर होगा। शास्त्र आदि द्वापर से शुरू होंगे। जिनके लिए बाप समझाते हैं - इनसे परमधाम का रास्ता नहीं मिलता है। ग्रन्थ पहले बहुत छोटा था, दिन-प्रतिदिन बड़ा बनाते जाते हैं। वास्तव में शिवबाबा की जीवन कहानी बड़ी बनानी चाहिए। तुम बच्चे बाप की जीवन कहानी जानते हो।

बाप समझाते हैं - मैं भक्ति मार्ग में क्या-क्या करता हूँ। भक्ति मार्ग में भी इन्श्योरेन्स करता हूँ। ईश्वर अर्थ मनुष्य दान करते हैं। कहते हैं ना इसने ईश्वर अर्थ किया है तब साहूकार घर में जन्म लिया है। भक्ति में धर्मात्मा बहुत होते हैं। बाबा कहते हैं मैं बच्चों को दूसरे जन्म में इसका अल्पकाल के लिए फल देता आया हूँ। अच्छा वा बुरा फल मिलता है ना। कितना बड़ा इन्श्योरेन्स हुआ। जो जैसे कर्म करते हैं उस अनुसार फल मिलता है। माया उल्टा कर्म कराती है, जिससे तुम दु:ख पाते हो। अब मैं तुमको ऐसे कर्म सिखलाता हूँ, जो कभी दु:ख नहीं होगा और वहाँ माया भी नहीं होती तो जो जितना अपने को इन्श्योर करे।

शिवबाबा भी नम्बरवन ट्रस्टी है। दूसरे की आसक्ति जाती है, कोई ट्रस्टी किसका खाना खराब भी कर देते हैं। बाबा देखो कैसा ट्रस्टी है। कहते हैं यह सब कुछ बच्चों के लिए है। तुम्हारा सारा कनेक्शन शिवबाबा से है। बाप कहते हैं मैं सच्चा ट्रस्टी हूँ। मैं खुद सुख नहीं लेता हूँ, बच्चों को सारी राजधानी दे देता हूँ। यह बाबा भी कहते हैं - मैंने फुल इन्श्योर कर लिया है। तन-मन-धन सब बाबा की सर्विस में है। सिन्धी में एक कहावत है - "हथ जिसका हिंय पहला पुर सो पहुँचे...." (दाता समान हाथ हैं तो वह पहला नम्बर पहुंच जाते हैं) दो मुट्ठी देते हैं तो महल मिलते हैं। देखो, अभी मकान बना है, कोई ने एक रूपया भेजा - हमारी ईट लगा दो... अरे, तुमको सबसे अच्छा महल मिलेगा क्योंकि तुम गरीब हो। मैं हूँ ही गरीब निवाज़। गरीब का एक रूपया, साहूकार का 10 हज़ार। दोनों को एक ही मर्तबा मिल जाता है। साहूकार बहुत मुश्किल आते हैं। कन्यायें सबसे फ्री हैं। नम्बरवन देखो मम्मा गई। बाबा ने सब कुछ दिया फिर भी पहले लक्ष्मी फिर नारायण, कितना वन्डरफुल खेल है!

कभी भी, किसी बात में संशय नहीं होना चाहिए। जरा भी संशय नहीं लाना चाहिए। बहुत मीठा बनना है। कदम-कदम पर श्रीमत लेनी है। नहीं तो माया बहुत नुकसान करा देती है। कितने बच्चों को डायरेक्शन देने पड़ते हैं। बाबा कहते हैं पूरा समाचार लिखो। बाबा हर प्रकार की सम्भाल करेंगे। बाबा को बहुत ख्याल रहता है - कहाँ यह बच्चा चढ़ जाए। पढ़ाई पर पूरा ध्यान देना चाहिए। तुम मोस्ट बिलवेड गॉड फादरली स्टूडेन्ट हो। भगवानुवाच भी गाया हुआ है, परन्तु कृष्ण का नाम डाल दिया है। कृष्ण भी सब मनुष्यों से ऊंचा ठहरा। फर्स्ट नम्बर श्रीकृष्ण का नाम देते हैं, नारायण का क्यों नहीं? कृष्ण है छोटा सतोप्रधान। फिर युवा, वृद्ध अवस्था होती है। बालक ब्रह्म ज्ञानी समान कहते हैं। बच्चे से पाप नहीं होता है। कृष्ण का भी जन्म-दिन मनाते हैं, कृष्ण को द्वापर में ले गये हैं। यह सब बाप ही समझाते हैं।

इस समय तुम ब्राह्मण हो उत्तम। तुम हो ईश्वरीय सन्तान। सतयुग में ईश्वरीय सन्तान नहीं कहलायेंगे। ईश्वर से जरूर स्वर्ग की प्राप्ति होगी। यह है तुम्हारा अति अमूल्य दुर्लभ जीवन। सभी का तो हो नहीं सकता। यह ड्रामा ही ऐसा बना हुआ है। जो कल्प पहले पढ़े थे, वही अब पढ़ रहे हैं। भगवान ने जरूर भगवान भगवती रचे हैं। परन्तु उन्हों को हम भगवान भगवती कह नहीं सकते क्योंकि गॉड इज़ वन। उस निराकार की सारी महिमा है। साकार की थोड़ेही महिमा होती है। लक्ष्मी-नारायण को निराकार ने ऐसा बनाया। तुम भी बाप द्वारा स्वर्ग के मालिक बन रहे हो। राजयोग सीख रहे हो। बरोबर गीता में राजयोग है। जब राजाई स्थापन हुई थी तो उस समय विनाश भी हुआ था। अभी है संगम। शिवबाबा आते हैं तो खेल पूरा करते हैं। फिर कृष्ण का जन्म होता है। भक्ति मार्ग में बहुत बड़े-बड़े मन्दिर बनाते हैं। उन मन्दिरों में पदमों की मिलकियत थी। अब तो सब लोप हो गये हैं। भक्ति मार्ग के शास्त्र पढ़ते-पढ़ते, यात्रा करते-करते, मन्दिर बनाते-बनाते, खर्चा करते-करते भारत कंगाल बन पड़ा है।

अभी तुम जैसे मास्टर नॉलेजफुल हो गये हो। बाप ज्ञान का सागर, आनन्द का सागर, ब्लिसफुल है। यह सब बाप की ही महिमा है। बाप कहते हैं - भारत सबसे अच्छा तीर्थ स्थान है। परन्तु कृष्ण का नाम डालने से सारा मान खत्म कर दिया है। नहीं तो सब शिव के मन्दिर में फूल चढ़ाते। सबका सद्गति दाता एक है। आधाकल्प तुम प्रालब्ध भोग नीचे आते जाते हो, सबको तमोप्रधान बनना ही है। अब बाप कहते हैं जो बैग बैगेज हैं सब दो तो तुमको ट्रांसफर कर सतयुग में दे देंगे। हम खुद तो नहीं लेते हैं। मनुष्य तो अपने लिए करते हैं फिर कहते हैं हम निष्काम करते हैं। परन्तु निष्काम तो कोई कर नहीं सकता। हर चीज़ का फल जरूर मिलता है। मैं तो तुम बच्चों को अविनाशी ज्ञान-रत्न देता हूँ। तुम्हारे लिए ही वैकुण्ठ लाता हूँ। बच्चों को सावरन्टी का सोविनियर (सौगात) देता हूँ। तो वह लेने लिए लायक बनना चाहिए। स्वर्ग का मालिक बनना है। हथेली पर बहिश्त मिलता है। सेकण्ड में जीवन्मुक्ति अथवा सेकण्ड में बादशाही। दिव्य दृष्टि दाता शिवबाबा है। सेकण्ड में वैकुण्ठ में ले जाते हैं, इस साकार बाबा के हाथ में चाबी नहीं है। बाप कहते हैं मैं तुम बच्चों को राजाई देता हूँ। मैं राजाई नहीं करता हूँ। फिर तुम जब भक्ति मार्ग में जायेंगे तो तुमको दिव्य दृष्टि से बहलाऊंगा। कितना अच्छी रीति बाप समझाते हैं।

बाबा कल्प-कल्प, कल्प के संगम पर एक ही बार आते हैं। बाकी इतने अवतार आदि सब गपोड़े हैं। यह शास्त्र हैं ही सब भक्ति मार्ग के। वह भी बनी बनाई बन रही अब कुछ बननी नाहि। जो कुछ होता है ड्रामा में नूँध है, इसको साक्षी होकर देखो। बाबा बहुत अच्छी रीति समझाते हैं - बच्चे, मैं तुम्हारा इन्श्योर मैगनेट हूँ। तुम्हारी एक पाई भी नहीं गँवाता हूँ। कौड़ी से तुमको हीरे तुल्य बनाता हूँ। यह सब शिवबाबा करते हैं इनके द्वारा। करनकरावनहार वह है। निराकार और निरंहकारी वह है। गॉड फादर कैसे बैठ पढ़ाते हैं। ऐसे नहीं कहते हैं चरणों में पड़ो। बाप ओबीडियन्ट सर्वेन्ट है। बाप कहते हैं जिनको मालिक बनाया वह पहले बहुत सुख भोगते हैं, अब दु:खी हुए हैं। सुख भी बहुत मिलता है। कोई धर्म को इतना सुख नहीं मिलता। ऐसे नहीं कह सकते कि भारतवासियों को क्यों? औरों ने क्या किया? अरे, इतने ढेर मनुष्य हैं, सब तो नहीं आ सकते हैं। ड्रामा बना हुआ है। भारत में ही आदि सनातन देवी-देवता धर्म था। भगवान ने आकर सच्चा राजयोग सिखाया था। बाप कहते हैं मैं फिर आया हूँ। तुमने 84 जन्म पार्ट बजाया अब फिर से घर वापिस जाते हैं। यह बहुत पुराना चोला हो गया है। सर्प का मिसाल। सन्यासी फिर कहते हैं आत्मा, परमात्मा में लीन हो जाती है। ऐसी अवस्था में रहते-रहते फिर शरीर छोड़ देते हैं। परन्तु ब्रह्म में लीन तो कोई होता नहीं। लेकिन उन्हों में भी कोई-कोई बहुत तीखे होते हैं। शान्त में बैठ शरीर छोड़ देते हैं। ब्रह्म तो बाबा नहीं है। यह उन बिचारों का भ्रम है। जैसे हिन्दुओं का यह भ्रम है कि हम हिन्दू धर्म के हैं। अरे, हिन्दू धर्म कहाँ से आया? वह तो हिन्दुस्तान का नाम है। सतयुग में एक ही धर्म था। अब तो देखो कितने धर्म हैं! कितनी भाषायें हैं! वहाँ तो भाषा ही एक होती है। कहते हैं वन गवर्मेन्ट हो परन्तु सभी गवर्मेन्ट वन कैसे होगी। ब्रदरहुड भी नहीं समझते, सर्वव्यापी कह देते तो फादर हुड हो गया फिर खुद फादर कह कर किसको बुलायेंगे। यह भी समझ की बात है ना। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद, प्यार और गुडमार्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

 

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) किसी का भी अवगुण नहीं देखना है। एक शिवबाबा से कनेक्शन रख उनकी जो श्रीमत मिलती है उसे राइट समझ चलते रहना है। श्रीमत में कभी संशय नहीं उठाना है।

2) अपने तन-मन-धन को पूरा इन्श्योर करना है। कदम-कदम पर श्रीमत लेनी है। पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान देना है।

 

वरदान:-

नेचुरल अटेन्शन वा अभ्यास द्वारा नेचर को परिवर्तन करने वाले सिद्धि स्वरूप भव

 

आप सबके निज़ी संस्कार अटेन्शन के हैं। जब टेन्शन रखना आता है तो अटेन्शन रखना क्या बड़ी बात है। तो अब अटेन्शन का भी टेन्शन न हो लेकिन नेचुरल अटेन्शन हो। आत्मा को न्यारा होने का नेचुरल अभ्यास है। न्यारी थी, न्यारी है फिर न्यारी बनेंगी। जैसे अभी वाणी में आने का अभ्यास पक्का हो गया है, ऐसे वाणी से परे, न्यारे होने का अभ्यास भी नेचुरल हो जाये तो न्यारेपन के शक्तिशाली वायब्रेशन द्वारा सेवा में सहज सिद्धि को प्राप्त करेंगे और यह नेचरल अभ्यास नेचर को भी बदल देगा।

 

स्लोगन:-

अशरीरी-पन की एक्सरसाइज और व्यर्थ संकल्पों के भोजन की परहेज करो तो एवरहेल्दी रहेंगे।

Share on Facebook
Please reload

Please reload

Recent Posts
Please reload

*Thought for Today*

'In this time, being Godly children, it is our duty to spread the vibrations of peace and healing powers. Practice.'

Prajapita Brahma Kumaris Ishwariya Vishwa Vidhyalaya

 (Godly Spiritual University)

Established by God, this is the World Spiritual University for Purification of Souls with the knowledge and RajaYoga taught by the Supreme Soul (God), giving his most beneficial advice. 

Established in 1936, by today has more than 8500 centres in around 140 countries. World transformation is taking place. Come and know .more

Main Address :

Om Shanti Bhawan, 

Madhuban, Mount Abu 

Rajasthan, India  307501

Download App :

Android App logo jpg
iOS App for iPhone

Mains

Wisdom

Services

© 2020  Shiv Baba Service Initiative

Search logo JPG
YouTube- Bk Shivani
Brahma Kumaris SoundCloud
Facebook - Bk Shivani
Instagram-Brahma Kumaris