शिव बाबा की मुरली और याद का पुरुषार्थ

10 Nov 2018

मुरली अर्थात ज्ञान व श्रीमत और फिर शिव याद कैसे करे? याद की विधि बाप समझाते है . शिव बाबा की मुरली और याद का पुरुषार्थ - बी.के अनिल द्वारा आर्टिकल (An article by BK Anil)

 

Q :  हर मुरली में शिवबाबा याद करने पर जोर देते हैं, सिर्फ याद करने से ही विकर्म विनाश कैसे होता है कृपया स्पष्ट करें ?

जैसे स्थूल कीचड़े को भस्म करने के लिए अग्नि का इस्तेमाल होता है अथवा सूर्य के किरणों को lens के माध्यम से एकाग्र करते हैं वैसे ही आत्मा द्वारा जन्मजन्मान्तर के विकर्मों द्वारा निर्मित संस्कार रूपी कीचड़े को भस्म करने के लिए परमात्मा रूपी ज्ञान सूर्य की आवश्यकता होती है । आत्मा के विकर्म रूपी कीचड़े का विनाश किसी भी स्थूल सूक्ष्म साधन द्वारा संभव नहीं क्योंकि कोई भी साधन महातत्व अर्थात भौतिक पञ्च तत्वों के अंतर्गत आता है जिसे उर्जात्मक इथर कहते हैं यहाँ तक कि ब्रह्मतत्व जो स्वयं प्रकाशित इथर है उससे भी आत्मा के विकर्म विनाश नहीं होंगे । चैतन्य आत्मा जो दिव्य लाइट से निर्मित है एक अविनाशी सत्ता है और वह अति सूक्ष्म होने के कारण जब उसका कनेक्शन डायरेक्ट परमधाम में हाईएस्ट चैतन्य दिव्य ज्योति से होता है जो सदा सत्य सदा पावन सदा सर्वशक्तिमान है तब उससे उत्पन्न योगाग्नि ही जन्मजन्मान्तर के पाप व विकर्मों को भस्म करने में समर्थ होती है । जब आत्मा परमधाम में केवल एक विचार में स्थित रहती है तो highest stable state में रहती है जिसे ही delta state भी कहते हैं । इस अवस्था में आत्मा supreme power house परमात्मा से  अधिकतम ऊर्जा ग्रहण करती है जिससे विकर्म विनाश होता है । इसे ही ज्वालामुखी योग भी कहते हैं ।

*आज की ६-११-१८ की साकार मुरली पर सारयुक्त मंथन :*

 

१. शरीर को आधार भले ही बनायें पर उसका बार बार चिंतन नहीं करना है चाहे उसको सुन्दर बनाने की बात हो अथवा कर्मभोग हो क्योंकि एक तो यह शरीर पुराना है शुद्ध तत्त्व से बना हुआ नहीं है, विकर्मों के हिसाब किताब हैं जिसके चुक्तु होने में ही भलाई और फायदा है । दूसरी बात जितना शरीर से लोभ रखेंगे तो बुद्धि देह तरफ ही जायेगी और बीमारी और आती जायेगी । नियम है कि जैसा चिंतन वैसा परिणाम । Energy flows where the attention goes. अंत में बाबा ने इस पर कहा है शरीर भी ठीक तब रहेगा जब ज्ञान और योग की धारणा होगी । धारणा नहीं होगी तो शरीर और भी सड़ता जाएगा ।

 

२. मुरली में बाबा ने *ज्ञान और बुद्धि* के महत्त्व पर विशेष अटेंशन दिलाया है और उसके द्वारा क्या पद की प्राप्ति होती है वह भी बताया है । जैसे ज्ञान से ही सद्गति होती है । जो अच्छे अच्छे बच्चे हैं उन्हों की बुद्धि में अच्छी – अच्छी पॉइंट्स बहुत निकलती है । दिन प्रतिदिन इन्वेंशन होती रहती है । जिन्हों की अच्छी प्रैक्टिस होगी वह नई नई पॉइंट्स धारण करते होंगे । धारण नहीं करते तो महारथियों की लाइन में नहीं लाया जा सकता । यहाँ पर *ज्ञान का और पद* का connection दिया है । फिर आगे है जो तीखे बच्चे हैं जिनके बुद्धि में बहुत पॉइंट्स हैं, उनकी मदद सब मांगते हैं । इसके साथ में फिर *धारणा* को भी जोड़ दिया कि बुद्धि में ज्ञान के पॉइंट्स होने के साथ *निरहंकारी और मीठा स्वभाव* भी होना चाहिए तभी नाम जपेंगे । मीठा बनने से ही मीठा व्यवहार करेंगे । ज्ञान को केवल पाठशाला अथवा सेवाकेंद्र तक ही सीमित नहीं रखना है बल्कि घर पर जाकर *होमवर्क* अथवा विचार करने को कहा है । *कर्मयोगी बनना है जिसमें ३ बातें आ गयी है कम से कम १५-२० मिनट क्लास, फिर उसको धारण करना और धंधा धोरी में लगना* । जब अपने कर्मक्षेत्र पर उतरते हैं तभी ही तो पता चलता है कितना धारण किया है । इसकी चेकिंग जरुरी है । *रात्रि में ज्ञान मंथन* अथवा स्वदर्शन चक्र फिराते नींद में जाने से सवेरे भी वही पॉइंट्स याद आती रहेगी । यह भी सबसे बड़ा फायदा हो जाएगा । ज्ञान और योग बल की रेस है ऐसा कहा है जो इनमें तीखे जाते हैं वही गले का हार बनते हैं । ज्ञान मानसरोवर में डुबकी मारते रहने की बात आयी है । ऐसा करने से स्वर्ग की परी बन जायेंगे । यह भी ज्ञान मंथन द्वारा प्राप्ति है । योग बल के बारे में कहा है कि इससे काम सहज हो जाते हैं । कोई काम नहीं कर सकते हैं तो गोया ताकत नहीं है ।

 

३. सबसे विशेष बात योग के सम्बंधित यह आयी कि *तुम बच्चे मुझे याद करेंगे तो मैं भी मदद करूँगा* । तुम नफरत करोगे तो मैं क्या करूँगा । *नफरत करेंगे तो गोया अपने ऊपर नफरत करते हैं, पद नहीं मिलेगा* । ( बाबा ने यहाँ पर यह नहीं कहाँ कि मैं भी करूँगा क्योंकि भगवान है सुखकर्ता दुःखकर्ता नहीं , घृणा, नफरत जैसा अवगुण उनमें अंश मात्र भी नहीं है तो हमें भी बाप समान बनना है तो इन अवगुणों से पुर्णतः मुक्ति पानी होगी ।

 

*सभी बी.के परिवार को दीपावली की और नए वर्ष की हार्दिक शुभ कामनाएं इस पर भी मुरली में है मनुष्य की सद्गति तब होती है जब सतयुग की स्थापना होती है । तभी ही हम सच्ची सच्ची दीपावली भी मनाएंगे । उसके पहले यह संकल्प आया की संगम युग भी तो दीपावली ही है जब परमात्मा आत्माओं का और हम अन्य आत्माओं का ज्ञान दीप जलाते हैं तो ऐसे ज्ञान दीपावली द्वारा सतयुग की दीपावली को जल्द ही मनाने की मुबारक* ।

 

ओम शांति

BK Anil Kumar

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७ दिवसीय राजयोग का कोर्स

 

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