गीता भगवान की प्रत्यक्षता (GOD OF Gita)

4 Mar 2019

सब सत्यों में सत्य महान निराकार शिव है गीता का भगवान । गीता को विश्व में महानतम ग्रंथों की श्रेणी में रखा गया है क्योंकि इसमें ही भगवान उवाच शब्द आया है अर्थात ईश्वर के महावाक्य जो इसी ग्रन्थ की विशेषता है । गीता में सभी वेद शास्त्रों के ज्ञान का सार है । इसलिए इसे सर्वशास्त्रमई शिरोमणि का दर्जा भी प्राप्त है । अब सब से बड़ा प्रश्न उठता है वास्तविक गीता का भगवान कौन ? निराकार जो जन्म मरण से न्यारा है  या देहधारी देवता जो जन्म मरण के चक्र में आता है ।

 

गीता में निराकार भगवान के बदले साकार देहधारी मर्यादा पुरुषोत्तम देवता याने रचयिता के बदले रचना का नाम डालने से गीता खंडित हो गयी नहीं तो गीता सारे विश्व में पूज्यनीय होती क्योंकि निराकार परमपिता परमात्मा को तो सभी देशों में और सभी धर्म वाले मानते हैं ।

 

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गीता के भगवान शिव की प्रत्यक्षता

 

आखिर इस कलियुगी लोह युग की अज्ञानांधकार रूपी रात्रि में दुःखमय विकारी भ्रष्टाचारी हिंसक दुनिया का अंत कर नये स्वर्णिम युग जिसका वर्णन रामराज्य स्वर्ग हेवन बहिश्तइत्यादि नामों से शास्त्रों व अनेक धार्मिक ग्रंथो में उपलब्ध है स्थापन करने हेतु सारे जहॉंन का नूर ज्ञानसूर्य  इस धरा पर आ चुके हैं जिससे यह धरा पुनः सशक्त पावन बन निवास लायक सुंदर स्थान बन जाए । चूंकि परमात्मा एक है इसलिए वे एकधर्म व एक वैश्विक परिवार की स्थापना करते हैं ।

 

यह वही निराकार भगवान है जिनके महावाक्य भारत के पवित्र सनातन ग्रंथ गीता में वर्णित है“ यदा यदाहि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत……तदात्मानं सृजाम्यहम……संभवामि युगे युगे।  अर्थात भारत में अति धर्म ग्लानि के समय जब अनैतिकता अत्याचार भ्रष्टाचार पापाचार अपनी चरम सीमा पर होते हैं तभी मैं एक साधारण मनुष्य तन का आधार लेकर एक सतधर्म वाला श्रेष्ठाचारी दुनिया की स्थापना ईश्वरीय ज्ञान व सहज राजयोग की शिक्षा द्वारा करता हूँ जिससे एक नये युग की शुरूआत होती है । वर्तमान समय हम हर तरह के दुःख, भ्रष्टाचार, पाप कर्म, हिंसक प्रवृत्तियों के साक्षी एवं अनुभवी हैं इससे सिद्ध है कि दुनिया आज अंतिम चरण में पहुँच चुका है जैसे कि वर्णित है।

 

परमात्मा द्वारा विश्व परिवर्तन के कार्य को साकार में लाने के लिए हम पार्टधारी परमात्मा की संतान आत्माओं को सबसे पहले अपने पिता परमात्मा को पहचानना होगा जो स्वर्ग हेवन बहिश्त जन्नत का रचयिता है व जिन्हें शिव, अल्लाह, खुदा, जेवोहा, ओंकार, वाहेगुरू इत्यादि अनंत नामों से विभिन्न धर्मों तथा पंथों में जानते तो हैं परंतु सच्चा परिचय तो वे स्वंय  ही कल्प के अंत में आकर देते हैं । दूसरा उनके श्रीमत अथवा मार्गदर्शन अनुसार अपनी आत्मा को पवित्र बनाकर आसुरी अवगुणों याने हिंसक विकारी स्वभाव को परिवर्तन करना होगा जिसके कारण हम देवता पद से नीचे गिरे और यह सुंदर धरा स्वर्ग से नरक में तबदील हो गया ।  परमात्मा हमारा रचयिता है बाकी सभी उसकी रचनायें हैं परंतु हम आत्माओं का पिता और बच्चे का अनादि संबंध है।

 

अभी परमात्मा पिता कहते हैं “ देह सहित देह के सभी संबंधो का भूल अपने को चेतन ज्यार्तिबिन्दु आत्मा समझ मुझ निराकार ज्यार्तिबिन्दु परमात्मा को याद करो तो तुम्हारे पाप कर्म नष्ट हो जायेंगे व तुम अपना स्वर्गीय राज्य भाग्य का ईश्वरीय जन्मसिद्ध अधिकार प्राप्त कर मेरे साथ अपने वास्तविक घर परमधाम वा मुक्तिधाम चलेंगे।

 

वर्तमान समय हम विश्व परिवर्तन की चरम सीमा पर खड़े हैं और कुछ ही समय शेष बचे हैं जिसमें हमें स्वपरिवर्तन कर भविष्य में आने वाली नई स्वर्गीय दुनिया में पवित्रता, सुख, शांतिका अपना जन्मसिद्ध  अधिकार परमात्म पिता से प्राप्त कर सकते हैं । ध्यान रहे एक बार मौका खोना माना सदा के लिए खो देना । अभी नहीं तो कभी नहीं । जागो जागो अधिक देरी होने से पहले फिर यह उल्हना न देना कि  भाग्य विधाता भगवान भाग्य बॉटने आये और हमें संदेश का पता ही नही चला ।

परमात्म पिता को हार्दिक अर्पण

 

ईश्वरीय सेवा में…

BK Anil

 

इस विडियो में संक्षिप्त रूप में गीता के भगवान के दिव्य अवतरण का समय, उनका साकार माध्यम, उद्देश्य, विश्व परिवर्तन में हम आत्माओं का सहयोग, परमात्मा सन्देश, तथा भविष्य में आने वाली नयी स्वर्गीय दुनिया में अपना जन्मसिद्ध अधिकार प्राप्त करने हेतु अटेंशन खीचंवाया गया है ।

 

 

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