ब्रह्मा बाप समान, एक कविता (Hindi Poem)

3 Feb 2019

Becoming equal to Brahma baba (a Hindi poem for special January Purusharth) 

अव्यक्त मास दिनांक 1.1.2019 से 31.1.2019 तक की मुरलियों में ब्रह्मा बाप समान बनने के लिए प्राप्त विशेष पुरुषार्थ की पॉइंट्स को आधार बनाकर यह कविता बनाई गई है।

 

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Poem begins from below verse. To download/print this poem, visit the PDF version.

 

*** Poem ***

 

अन्तर्मुखी अव्यक्त और अलौकिक बन जाओ

 

अव्यक्त फरिश्ते स्वरूप में नजर सबको आओ

 

अलौकिकपन में कभी लौकिकपन ना मिलाना

 

अलौकिक और अन्तर्मुखी नजर सबको आना

 

औरों के दिल का राज अन्तर्मुखता द्वारा जानो

 

इसी विधि द्वारा औरों के मन के भाव पहचानो

 

साधारणता में असाधारण का अनुभव कराओ

 

बाहरमुखता में आते अन्तर्मुखता भी अपनाओ

 

बाहरमुखता के कारण ना आए कोई व्यवधान

 

कर्म व्यवहार में आते हुए रखना इसका ध्यान

 

बाप समान तुम अपनी रूहानी स्थिति बनाओ

 

दिव्य गुणों का एसेंस अपने अन्दर भरते जाओ

 

कर्म सभी करना सदा तुम होकर तन से न्यारा

 

यही अलौकिकपन तुम्हें बनाएगा सबका प्यारा

 

सितारों के संगठन में विशेष सितारा कहलाओ

 

अपने जीवन को बाप जैसा अलौकिक बनाओ

 

नैनों से तुम बाप समान रूहानियत झलकाओ

 

चलन से बाप के चरित्र का साक्षात्कार कराओ

 

अपने मस्तक से सदा मस्तकमणी नजर आओ

 

अपनी अलौकिक अवस्था प्रत्यक्ष करते जाओ

 

कर्म करते बन जाओ फरिश्ता और निराकारी

 

बाप समान करो ये एक्सरसाइज मन की सारी

 

जितना खुद को तुम बोझ मुक्त बनाते जाओगे

 

बाप समान फरिश्ता सबको नजर तुम आओगे

 

चलते फिरते देहभान रहित का अनुभव पाओ

 

देहभान से न्यारा अपना प्रकाश रूप दिखाओ

 

देह से न्यारी स्वयं की फरिश्ता स्थिति बनाओ

 

ब्रह्मा बाप का ये अभ्यास फॉलो करते जाओ

 

परमधाम जाने के लिए अव्यक्त रूप अपनाओ

 

मन की एकाग्रता पर विशेष ध्यान देते जाओ

 

वृत्ति दृष्टि कर्म में न्यारेपन का अनुभव कराओ

 

दिव्य फरिश्ता स्वरूप में नजर सबको आओ

 

अपना फरिश्ता रूप का अनुभव सदा बढ़ाओ

 

अशरीरीपन का अभ्यास बार बार करते जाओ

 

एक सेकण्ड में सारे व्यर्थ संकल्पों को मिटाओ

 

सारे संस्कार स्वभाव को डबल लाइट बनाओ

 

सर्व प्रकार के मेरेपन को एक बाप में समाओ

 

एक बाप में मन को लगाकर एकाग्रता बढ़ाओ

 

जहां चाहो जैसा चाहो उतना मन को टिकाओ

 

 

एकरस फरिश्ता रूप का अनुभव करते जाओ

 

फरिश्ता बनकर ब्रह्मा बाप से प्यार निभाओ

 

अपने भविष्य स्वरूप का साक्षात्कार कराओ

 

जब अपना फरिश्ता रूप नजर सबको आए

 

समझो हम सम्पूर्णता के पास आए कि आए

 

अपना अलौकिक जीवन बन्धनमुक्त बनाओ

 

अधीनता से मुक्त होकर स्वतन्त्रता को पाओ

 

अपने आपको न्यारा और प्यारा बनाते जाओ

 

अपने शरीर और कर्मों की अधीनता मिटाओ

 

बीजरूप स्टेज का करना पावरफुल अभ्यास

 

सारे संसार को देना सर्व शक्तियों की सकाश 

 

बीजरूप अवस्था से माइट हाउस बनते जाओ

 

सम्पूर्ण कल्प वृक्ष में सर्वशक्तियों को फैलाओ

 

ब्रह्मा बाप समान तुम प्रभु प्यार में खो जाओ

 

प्रभु स्नेह भरे शब्द बोलकर जादू मंत्र चलाओ

 

संकल्प बोल और कर्म में रखना बाप को संग

 

स्नेह में सबको बांधकर लगाओ प्यार का रंग

 

 

सब बातों के विस्तार को बिंदी सार में समाओ

 

समय और मेहनत बचाकर बिंदी में खो जाओ

 

जब तुम परमात्म प्यार में लवलीन हो जाओगे

 

प्रेम स्वरूप मास्टर प्यार के सागर बन जाओगे

 

ज्ञान सूर्य की किरणों से जिन्दगी जगमगाएगी

 

हर पल मन में प्यार की लहरें उछलती जाएगी

 

पुरुषार्थ के लिए किसी को आधार ना बनाओ

 

देह की स्मृति भूलकर बाप शमा में खो जाओ

 

अपना रूप तुम इस कदर बाप समान बनाओ

 

सबको बाप समान लाइट माइट नजर आओ

 

प्रभु प्रेम को अपने जीवन का आधार बनाओ

 

इसी प्यार से ब्राह्मण जीवन को आगे बढ़ाओ

 

प्रभु प्यार की सम्पत्ति पर बच्चों का अधिकार

 

ब्रह्मा बाप समान इसको बनाओ अपना संसार

 

कर्म वाणी सम्पर्क संबंध में रखना सबसे प्यार

 

लेकिन अपनी स्मृति में केवल बाबा हो संसार

 

लवली बनकर ही बाप में लवलीन रह पाओगे

 

आप समान बाप समान सबको बना पाओगे

 

मैंपन को त्यागकर लवलीन स्थिति अपनाओ

 

हर आत्मा का ध्यान बाप की ओर खिंचवाओ

 

नॉलेज के आधार पर बाप की याद में समाओ

 

अव्यक्त स्वरूप धरकर बाप समान बन जाओ

 

अपनी स्थिति लग्न की अग्नि स्वरूप बनाओ

 

त्रेसठ जन्मों के विकर्म इसी अग्नि में जलाओ

 

बाप समान स्वयं को मास्टर रचियता बनाओ

 

ब्रह्मा बाप समान कल्पवृक्ष पर खड़े हो जाओ

 

मास्टर बीजरूप अवस्था में खुद को टिकाओ

 

स्नेह सहयोग शुभकामना की किरणें फैलाओ

 

 

सार में सब समेटकर खुद को सम्पन्न बनाओ

 

सार स्वरूप स्थिति द्वारा व्यर्थमुक्त बन जाओ

 

बाप की पहचान का बीज हर आत्मा में डालो

 

सहज रीति से बीज का अच्छा फल निकालो

 

अमृतवेले करो पावरफुल स्थिति का अभ्यास

 

बाप से वरदान प्राप्ति का होगा तुम्हें एहसास

 

शक्तिशाली याद का रहेगा सारे दिन पर असर

 

बीजरूप निर्विघ्न स्थिति में जाएगा दिन गुजर

 

याद की शक्ति और अव्यक्त शक्ति को बढ़ाओ

 

पावरफुल ब्रेक से मन बुद्धि पर नियंत्रण पाओ

 

अपनी बुद्धि की शक्ति बर्बाद होने से बचाओ

 

परखने और निर्णय करने की ताक़त बढ़ाओ

 

ब्रह्मा बाप समान मास्टर ज्ञान सूर्य बन जाओ

 

योग किरणों से संस्कारों के कीटाणु मिटाओ

 

औरों को लाइट माइट का गोला नजर आओ

 

खुद को साक्षात और साक्षात्कार मूर्त बनाओ

 

विशेष पुरुषार्थ कर बाप से सर्व खजाने पाओ

 

अचल अडोल रहकर हर खजाना रोज बढ़ाओ

 

हर एक की राय को तुम सदा रिगार्ड देते जाना

 

किसी की राय सुनकर कन्फ्यूजन में ना आना

 

निमित्त आत्माओं के अनुभव का लाभ उठाना

 

समझ रखकर अपनी अवस्था एकरस बनाना

 

विघ्न विनाशक बनकर करना विघ्नों को पार

 

खेल का अनुभव कराए तुम्हें विघ्नों की बौछार

 

विघ्नों रूपी पहाड़ तुम्हें नजर आए राई समान

 

क्यों क्या के प्रश्नों का ना रहे कोई नाम निशान

 

आओ ब्रह्मा बाप समान अपना पुरुषार्थ बढ़ाएं

 

इसी वर्ष हम खुद को सम्पूर्ण कर्मातीत बनाएं

 

*ॐ शांति*

 

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