Gyan related Question Answers (Hindi)

22 Jul 2019

Question Answers in Hindi on Gyan, Yog and Murli related subjects. Total 4 Q and A in this PART 1 of 7. Visit: Question and Answers for more.

 

Question 1 :

Om shanti .. *Sidhhhi swarup aatmao ke har bol sidhh hote hai ... Siddhi swarup ko kaise emarge kare ya bane .. bataiyega bhai*
 

Answer:
ओम शांति।
हम सभी जानते है कि आत्मा की तीन मुख्य सूक्ष्म शक्तियां है - मन, बुद्धि और संस्कार। तो सिद्धि स्वरूप केवल वाचा की शक्ति में नही बल्कि संकल्प और हमारे प्रैक्टिकल कर्म भी सिद्धि स्वरूप हो।
अब सिद्धि स्वरूप कैसे बने ? कहते है कि विधि से ही सिद्धि प्राप्त होती है। भक्तिमार्ग में भी यज्ञ-हवन, पूजा-पाठ द्वारा मनोवांछित फल प्राप्त करने के लिए भी विधि-विधान अपनाया जाता है। ठीक इसी रीति से ज्ञानमार्ग में विधाता परमात्मा बाप ने भी सिद्धि प्राप्त करने वा सिद्धि स्वरूप बनने के लिए बहुत सरल विधि बताया है। बस इस विधि को अपनाने के लिए दृढ़ता और अटेन्शन रूपी चाभी हमेशा लगी हुई हो।

आप को ब्रह्मा बाबा के अंत समय के तीन महावरदानी महावाक्य तो याद होंगे ही ना। वे तीन महावाक्य है- निराकारी, निर्विकारी और निरहंकारी। इन तीन बातो को जीवन मे धारण कर कर सहज ही सिद्धि स्वरूप की स्थिति को प्राप्त कर सकते है। 
इसलिए सदा *मन से निराकारी अवस्था मे रहना है अर्थात सर्व के प्रति आत्मीक भाव रहे। बुद्धि से निर्विकारी रहना है अर्थात बुद्धि से सम्पूर्ण पवित्रता को धारण करना है और किस के अवगुणों को चित्त पर नही रखना है। और अंत मे संस्कार में निरहंकारिता को अपना नेचुरल गुण बनाना है।*

मन, बुद्धि और संस्कार में क्रमशः निराकारी, निर्विकारी और निरहंकारिता का श्रेष्ठ गुण धारण करेंगे तो सहज हमारे संकल्प, बोल और प्रैक्टिकल कर्म सिद्धि स्वरूप बन जाएंगे।
ओम शांति 

 

 

Question 2 :
आज की मुरली से। भारत ही पतित और भारत ही पावन है। बाकी सब हैं बाईप्लाट। इनका वर्णो के साथ कोई कनेक्शन नहीं है।
इसका क्या अर्थ है। Kindly explain.

 

Answer of 2 :
ओम शांति।
बाबा ने मुरलियों में बताया हुआ है कि भारत अविनाशी खंड है। इस बेहद ड्रामा का स्क्रिप्ट ही भारत के इर्द-गिर्द बुना हुआ है। जिस प्रकार स्थूल नाटक या फ़िल्म में किसी मुख्य हीरो-हेरोइन को केंद्र में रखते हुए ही अनेको अन्य पात्रों और काल्पनिक घटनाओं का चित्रण और प्रस्तुतिकरण किया जाता है या संक्षेप में यह कह सकते है कि हीरो - हेरोइन के पार्ट को उभारने के लिए अन्य पात्रों को उक्त नाटक या बायस्कोप में बाईप्लाट अर्थात फिक्स किया जाता है। ठीक ऐसे ही अविनाशी खंड भारत की महत्ता को बढ़ाने के लिए ही अन्य खंडों को इस बेहद ड्रामा में बाईप्लाट वा फिक्स किया गया है। इसलिए अंत मे सभी खंड समाप्त हो केवल एक मुख्य भारत खंड की सार्वभौमिकता ही सिद्ध होगी। 
ओम शान्त

 

Question 3 :
कल की मुरली में बाबा ने कहा कि:
" कहते हैं मेरे मन को शान्ति दो वास्तव में शॉन्ति तो आत्मा को चाहिये न कि मन को।"
क्योकि मन आत्मा की ही सूक्ष्म शक्ति है और मन में ही हलचल होती है। शान्त भी उसी को होना चाहिये। कृपया इसकी गुह्यता बतायें।*

 

Answer of 3 :
मन बुद्धि और संस्कार, ये तीनो चैतन्य शक्ति आत्मा की अंतर्निहित सूक्ष्म शक्तियां है। आत्मा अपने इन तीन सूक्ष्म शक्तियों द्वारा ही जड़ पंच महाभूतों से निर्मित इस शरीर और शरीर की स्थूल कर्मेन्द्रियों द्वारा कर्म कराती है। इसलिए बाबा ने एकदम सत्य कहा है कि शांति आत्मा को चाहिए ना कि मन को। भक्ति मार्ग में अज्ञानता वश जो मनुष्यात्माये कहती है कि मेरे मन को शांति चाहिए, वास्तव में ये कहना रॉंग हो जाता है क्योंकि मन तो आत्मा की शक्ति है तो शांति भी आत्मा को चाहिए कहना युक्तियुक्त है।

किसी बात पर सहज विश्वास ना होने पर कई बार साधारणतः हम कह देते है कि मेरा दिल इस बात को नही मान रहा या मेरा मन इस बात को कबूल नही कर रहा। अब खुद सोचे कि क्या दिल और मन अमुक बात को नही मान रहा या आत्मा को वो बात कबूल नही हो रही। सत्य तो ये है की भल हम मुख से दिल या मन के बात को कबूल ना करने को कह रहे होते है पर वास्तव में आत्मा को वो बात कबूल नही होती।

मन का कार्य है केवल संकल्पो की रचना करना और दिल का कार्य है शरीर मे खून के सुचारू संचालन करना। इसलिए मन हलचल में आती है ये कहना ज्ञानयुक्त नही है। चूंकि आत्मा का सत्य ज्ञान किस को भी नही है इसलिए अज्ञानतावश आत्मा को अशांत ना कहकर मन को कह दिया। लेकिन अगर आत्मा के मौलिक गुणों में कोई कमी आती है तो अशांत आत्मा होती है, मन नही। पर आत्मा अपनी उस समय की अवस्था को मन अर्थात संकल्प, बोल और कर्म द्वारा दर्शाती है। इसलिए बाह्यरूप से ऐसा प्रतीत होता है कि अमुक मनुष्यात्मा का मन आज अशांत है इसलिए आज उसका व्यवहार अलग है।
ओम शांति .

 

Question 4 :
* खान-पान की दिक्कत होती है। परन्तु ऐसी बहुत चीज़ें बनती हैं, डबल रोटी से जैम मुरब्बा आदि खा सकते हो।* 
आज की मुरली के महावाक्य है कृपा स्पष्ट कीजियेगा की हम बार का msin made चिप्स, ब्रेड, बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक ऐसी कोई भी चीज ले सकते है या नई???????*

 

Answer of 4 :
ओम् शांति बहन।
बहन, इस ज्ञान मार्ग में हमे उतनी प्राप्ति होगी जितना हम धारणाओं पर चलेंगे। और धारणाओं पर चलने में ही हमारी शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की सुरक्षा होती है। 

कहावत है - जैसा होगा अन्न, वैसा होगा मन। इसलिए विकारी के हाथ का बना हुआ खाने से हमारी विकारी वृत्ति में परिवर्तन नही हो पाता जिससे हम ज्ञान मार्ग में उड़ती कला में नही जा पाते और दिलशिकस्त हो पुरुषार्थविहीन हो जाते है। इसलिए अपने खान-पान की धारणा पर हम बच्चो को विशेष अटेंशन रखना है।

चिप्स, ब्रेड, बिस्कुट, कोल्ड ड्रिंक आदि का निर्माण जहाँ होता है, अगर आप उस स्थान को देख लेंगे तो स्वतः ही आप को इन चीज़ों से विरक्ति हो जाएगी। आने वाले समय मे बहुत सारी मौते food poisioning से भी होनी है। अगर अभी हमारी आदत बाहर की चीज़ों को खाने के लिए लालायित रहेगी , तो एक जिव्हा के लोभ विकार पर हम विजय कदापि नही पा सकेंगे और दूसरे food poisioning से हमारे स्वास्थ्य को भी गंभीर नुकसान हो सकता है। इसलिए ही मीठे बाबा ने हम बच्चों को बाहर की चीजों को खाने से मना किया हुआ है।
बाबा ने बाहर का ब्रेड, जैम आदि खाने का डाइरेक्शन उन आत्माओ को जो विदेश जा रहे हो, बीमार हो या जिन्हें किन्ही विशेष परिस्थितियों में जैसे शादी-विवाह में कुछेक दिन लौकिक संबंधियों के यहां रहना होता है उनके लिए दिया है। इसलिए केवल बाबा के महावाक्य के शब्द को ना पकड़ निहितार्थ या भाव को भी समझना युक्ति युक्त है।

मां का अपने बच्चों प्रति बनाया भोजन बहुत ऊर्जावान होता है क्योंकि उसमें मां का स्नेह और प्यार समाया होता है। वैसे भी मां को भगवान के समकक्ष माना गया है। 
इसलिए यदि माँ बिना प्याज लहसुन के खाना बनाती है तो मुझ आत्मा के विवेक अनुसार उसे अवश्य ग्रहण किया जा सकता है, भल माँ ज्ञान में ना भी चल रही तो तो भी।..... पर खाना खाते हुए उसकी चार्जिंग अवश्य कर ले। 

ओम शान्ति


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