ज्ञान, योग, धारणा, सेवा में पुरुषार्थ की विधि

27 Feb 2019

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आज बाबा ने ब्रह्माकुमार सूरज भाई जी द्वारा बहुत ही लाभदायक क्लास कराई इस में बाबा ने 16 अभ्यास बताएं  जिसके अभ्यास से आत्मा शक्तिशाली बन जाती है।

 

Today Baba gave a gift of points of Shrimat for Purusharth in our Four main subjects - Gyan, Yog, Dharna and Sewa. Here is the point wise notes. Do write down all points in your notebook or print it. (Also refer to page: Four Subjects)

 

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 इसके छोटे छोटे अभ्यास से बड़े अभ्यास बन जाते हैं बस लयबद्ध से अभ्यास करने से मन में शक्ति भरती हैं।

 

 

*  ज्ञान के 5 प्वांइट  *

 

1) मुरली को मनन जरूर जरूर करना है कि क्योंकि ज्ञान प्रकाश  अनुभूति है।

 

2) मुरली को समझना है एक एक वाक्य पर घ्यान देना है पहले समझना होगा फिर आगे बढना है गुह्यी अर्थ को समझना होगा।

 

3) मुरली  का वरदान या स्लोगन बच्चों की तरह रट लेना है फिर पुरा दिन याद करते करते अपने में समाना है।

 

4) बार बार पढ़कर फिर रिवाइज करना है पक्का पाठ याद करना है।

 

5) मुरली को कम से कम 2 बार पढ़ना है एक बार सुनना सुनने से कुछ बाते निकल जाती है।

 

 

*  योग की 4 प्वांइट  *

 

1) बाबा को बड़े प्यार बार बार बुलाना उनका आव्हान करना बाबा को अधिकार से बड़े प्यार बुलाओ बाबा आ जाओ ।

 

2) अमृत वेला ब्राह्मणों का फाउंडेशन है कभी मिस नहीं करना है रात को जल्दी सो जाना चाहिए।

 

3) बाबा को बार बार बड़े दिल से भाव से शुक्रिया कहना है शुक्रिया बाबा ।

 

4 अटेंशन  स्वय पर रखना है दूसरों को नहीं देखना है समय के महत्व को जान अपना पुरूषार्थ करना है।

 

 

*  धारणा के प्वाइंट  *

 

1) डिजिटल वर्ल्ड से दूर रहना है यही माया का प्रवेश द्वार है इसे केवल ज्ञान व सेवा प्रति प्रयोग करना है।

 

2) झगमूई झरमूई से दूर रहना है असत्य बात न सुन्नी है ना हि फैलानी है।

 

3) एकांत में जरूर बैठना है मौन में रहकर कर बाबा को याद करना है अंर्तमुखी बनना है।

 

 

*  सेवा के प्वांइट  *

 

1) सेवा में संकल्प बोल की इकोनामी करनी है साथ साथ भोजन पानी बिजली स्थूल धन की भी इकोनामी करनी है।

 

2) अपनी विशेषता को बढ़ाना है कुछ न कुछ नया सीख कर उसे सेवा में लगाना है।

 

3) सेवा में नवीनता लानी है एक जैसी नहीं करनी है जितनी नवीनता होगी तो खुशी भी रहेगी ।

 

4) 

सेवा श्रीमत अनुसार करनी है 

आत्म अभिमानी स्थिति में करनी है 

परमात्मा की याद सारा टाइम बनी रहे 

स्वमान की सीट पर सेट होकर करनी है

अपना तन मन धन सब सेवा में लगाना है सम्पूर्ण समर्पण 

सेवा निस्वार्थ निष्काम करनी है कोई इच्छा नहीं करनी है कोई वर्णन नहीं ।

 

* शुक्रिया बाबा शुक्रिया *

 

 

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