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Krishna Janmashtami (जन्माष्टमी) Message

Updated: Aug 11, 2020

On special occassion of Shri Krishna Jayanti (Janmashtami), come we learn about him, who is the GOD of Gita and what is the message of God (the Supreme Soul).

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आओ जानते है कृष्ण कौन है, गीता का भगवान कौन है? जानते है परमपिता निराकार परमात्मा का सन्देश। Visit General Articles for more articles in Hindi and English.


श्रीकृष्ण जयन्ती का आध्यात्मिक रहस्य

कुछ महापुरुष वा देवपुरुष ऐसे है जिससे लोगों को अलौकिक एवं आध्यात्मिक शक्ति तथा महान कर्म करने की प्रेरणा मिलती है। ऐसे ही श्रीकृष्ण जयंती आज के युग में सिर्फ मना लेना पर्याप्त नहीं बल्कि उनके द्वारा किये गए महान कर्मो के बारे में गहराई से चिंतन करने की आवश्यकता है। उनकी बाल लीलाओ तथा प्रत्येक कर्मों की आध्यात्मिक व्याख्या मनुष्य के लिए सन्देश है। अगर सामान्य तौर पर देखा जाये तो उनका जन्म , केवल एक साधारण मनुष्य जन्म के समान दिखाई देगा परन्तु हम जब तार्किक और उनके कर्तव्यों की व्याख्या करेंगे तब उनकी मानवीय कल्याणकारी संदेशों का आभास होने लगेगा।

श्रीकृष्ण ने अर्जुन को मनुष्यों के देह के ऊपर उठते हुए आत्मकेंद्रित होने के लिए आत्मा और उसकी सम्पूर्ण क्रियायों का विवेचन किया था। वास्तव में अर्जुन अर्थात ज्ञान का अर्जन करने वाला। इसीलिए आज प्रत्येक मनुष्य को अर्जुन बनने की आवश्यकता है। *महाभारत ये प्रत्येक घर की कहानी है। आज प्रत्येक घर में भाई - भतीजावाद इतना हावी है की लालच वश एक दूसरे का खून, व्यभिचार और अत्याचार की सीमा मानवीय संवेदनाओ को खंडित कर दिया है। महाभारत कल में तो एक द्रौपदी का चीरहरण हुआ था परन्तु आज तो लाखो द्रौपदियों का चीरहरण हो रहा है। वास्तव में ये कौन कर रहा है ?इसके बारें में हमें सोचना चाहिए। कोई भी मनुष्य एक दूसरे का शत्रु नहीं होता। मनुष्य के अंदर व्याप्त काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार यही मनुष्य के शत्रु है। जब हम इन पर विजय प्राप्त करेंगे तब ही हम सुख शांति से रह सकेंगे अर्थात एक *सुखमय साम्राज्य की स्थापना कर सकेंगे। आज हर घर में महाभारत जैसी स्थिति स्पष्ट दिखाई देती है। ऐसी परिस्थिति से निबटने के लिए हमें बाहरी हथियारों का नहीं बल्कि *आत्मिक और ईश्वरीय हथियारों* के उपयोग से सबसे पहले अपने अंदर छिपे उन महाशत्रुओं को नष्ट करना होगा जिनके प्रभाव से हम कुकर्म और व्यभिचार करते है। इसीलिए दैनिक दिनचर्या में रहते हुए अपने अंदर छिपे उन तमाम अदृश्य शत्रुओं का एक-एक कर नाश करना होगा जिनकी वजह से आज संसार श्मशान में तब्दील हो रहा है। श्रीकृष्ण ने हमेशा पांडवों का साथ दिया। *कौरव अर्थात परमात्मा से विपरीत बुद्धि और पांडव अर्थात परमात्मा में निष्ठा रखने वाले प्रीत बुद्धि*। इसीलिए हम विकारों पर जीत तब पा सकेंगे जब परमात्मा के साथ प्रीत बुद्धि होंगे। श्रीकृष्ण जयंती पर यही ईश्वरीय सन्देश है की *श्रीकृष्ण के अंदर जो मूल्य और विशेषताएं है उन्हें अपने जीवन में उतारने का प्रयास किया जाये। तथा गीता में वर्णित मनुष्य के अंदर छिपे शत्रुओं का नाश करें तभी छोटी मोटी बातों के लिए जो हर घर में महाभारत चल रहा है उसे समाप्त कर सकेंगे। और तभी श्रीकृष्ण जयंती का पर्व सार्थक हो सकेगा।

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