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BK murli today in Hindi 1 July 2018 - aaj ki murli


Brahma Kumaris murli today in Hindi - aaj ki murli - BapDada - madhuban - 01-07-18 प्रात:मुरली ओम् शान्ति ''अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइज: 14-12-83 मधुबन

प्रभु परिवार - सर्वश्रेष्ठ परिवार

आज बापदादा अपने श्रेष्ठ ब्राह्मण परिवार को देख रहे हैं। ब्राह्मण परिवार कितना ऊंचे ते ऊंचा परिवार है। उसको सभी अच्छी तरह से जानते हो? बापदादा ने सबसे पहले परिवार के प्यारे सम्बन्ध में लाया। सिर्फ श्रेष्ठ आत्मा हो, यह ज्ञान नहीं दिया लेकिन श्रेष्ठ आत्मा, बच्चे हो। तो बाप और बच्चे के सम्बन्ध में लाया। जिस सम्बन्ध में आने से आपस में भी पवित्र सम्बन्ध भाई-बहन का जुटा। जहाँ बापदादा, भाई-बहन का सम्बन्ध जुटा तो क्या हो गया! प्रभु परिवार। कभी स्वप्न में भी ऐसे भाग्य को सोचा था कि साकार रूप से डायरेक्ट प्रभु परिवार में वारिस बन वर्से के अधिकारी बनेंगे? वारिस बनना सबसे श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ भाग्य है। कभी सोचा था कि स्वयं बाप हम बच्चों के लिए हमारे समान साकार रूपधारी बन बाप और बच्चे का वा सर्व सम्बन्धों का अनुभव करायेंगे? सकार रूप में प्रभु पालना लेंगे, यह कभी संकल्प में भी नहीं था। लेकिन अभी अनुभव कर रहे हो ना! यह सब अनुभव करने का भाग्य तब प्राप्त हुआ जब प्रभु परिवार के बने। तो कितने ऊंचे परिवार के अधिकारी बच्चे बने। कितनी पवित्र पालना में पल रहे हो! कैसे अलौकिक प्राप्तियों के झूलें में झूल रहे हो! यह सब अनुभव करते हो ना। परिवार बदल गया। युग बदल गया। धर्म, कर्म सब बदल गया। युग परिवर्तन होने से दु:ख के संसार से सुखों के संसार में आ गये। साधारण आत्मा से पुरुषोत्तम बन गये। 63 जन्म कीचड़ में रहे और अभी कीचड़ में कमल बन गये। प्रभु परिवार में आना अर्थात् जन्म-जन्मान्तर के लिए तकदीर की लकीर श्रेष्ठ बन जाना। प्रभु परिवार, परिवार अर्थात् वार से परे हो गये। कभी भी प्रभु बच्चों पर वार नहीं हो सकता। प्रभु परिवार का बने, सदा के लिए सर्व प्राप्तियों के भण्डार भरपूर हो गये। ऐसे मास्टर सर्वशक्तिमान बन गये जो प्रकृति भी आप प्रभु बच्चों की दासी बन सेवा करेगी। प्रकृति आप प्रभु परिवार को श्रेष्ठ समझ आपके ऊपर जन्म जन्मान्तर के लिए चंवर (पंखा) झुलाती रहेगी। श्रेष्ठ आत्माओं के स्वागत में, रिगार्ड में चंवर झुलाते हैं ना। प्रकृति सदाकाल के लिए रिगार्ड देती रहेगी। प्रभु परिवार से अभी भी सर्व आत्माओं को स्नेह है। उसी स्नेह के आधार पर अभी तक गायन और पूजन करते रहते हैं। प्रभु परिवार के चरित्रों का अभी भी कितना बड़ा यादगार शास्त्र भागवत, प्यार से सुनते और सुनाते रहते हैं। प्रभु परिवार का शिक्षक और गाडली स्टूडेन्ट लाइफ का, पढ़ाई का यादगार शास्त्र गीता कितने पवित्रता से विधिपूर्वक सुनते और सुनाते हैं। प्रभु परिवार का यादगार आकाश में भी सूर्य, चन्द्रमा और लकी सितारों के रूप में मनाते और पूजते रहते हैं। प्रभु परिवार बाप के दिलतख्तनशीन बनते, ऐसा तख्त सिवाए प्रभु परिवार के और किसको भी प्राप्त हो नहीं सकता। प्रभु परिवार की यही विशेषता है। जितने भी बच्चे हैं सब बच्चे तख्तनशीन बनते हैं। और कोई भी राज्य परिवार में सब बच्चे तख्तनशीन नहीं होते हैं। लेकिन प्रभु के बच्चे सब अधिकारी हैं। इतना श्रेष्ठ और बड़ा तख्त सारे कल्प में देखा, जिसमें सभी समा जाएं? प्रभु परिवार ऐसा परिवार है जो सभी स्वराज्य अधिकारी होते। सभी को राजा बना देता। जन्म लेते ही स्वराज्य का तिलक बापदादा सभी बच्चों को देते हैं। प्रजा तिलक नहीं देते, राज्य तिलक देते हैं। महिमा भी राज्य तिलक की है ना। राज-तिलक दिवस विशेष मनाया जाता है। आप सबने अपना राज तिलक दिवस मनाया है या अभी मनाना है? मना लिया है ना! खुशी की निशानी, भाग्य की निशानी, संकट दूर होने की निशानी, तिलक होता है। जब कोई किसी कार्य पर जाते हैं, कार्य सफल रहे उसके लिए परिवार वाले तिलक लगाकर भेजते हैं। आप सबको तो तिलक लगा हुआ है ना। तिलकधारी, तख्तधारी, विश्व-कल्याण के ताजधारी बन गये हो ना। भविष्य का ताज और तिलक इसी जन्म के प्राप्ति की प्रालब्ध है। विशेष प्राप्ति का समय वा प्राप्तियों की खान प्राप्त होने का समय अभी है। अभी नहीं तो भविष्य प्रालब्ध भी नहीं। इसी जीवन का गायन है दाता के बच्चों को, वरदाता के बच्चों को अप्राप्त नहीं कोई वस्तु। भविष्य में फिर भी एक अप्राप्ति तो होगी ना। बाप का मिलन तो नहीं होगा ना। तो सर्व प्राप्तियों का जीवन ही ईश्वरीय परिवार है। ऐसे परिवार में पहुंच गये हो ना। समझते हो ना ऐसे ऊंचे परिवार के हैं! जिसकी महिमा करें तो अनेक रात दिन बीत जाएं। देखो, भक्तों को कीर्तन गाते-गाते कितने दिन और रात बीत जाते हैं। अभी तक भी गा रहे हैं। तो ऐसा नशा और खुशी सदा रहती है? मैं कौन! यह पहेली सदा याद रहती है? विस्मृति-स्मृति के चक्र में तो नहीं आते हो ना! चक्र से तो छूट गये ना। स्वदर्शन चक्रधारी बनना अर्थात् अनेक हद के चक्करों से छूट जाना। ऐसे बन गये हो ना। सभी स्वदर्शन चक्रधारी हो ना। मास्टर हो ना! तो मास्टर सब जानते हैं! रोज़ अमृतवेले मैं कौन - यह स्मृति में रखो तो सदा समर्थ रहेंगे। अच्छा!बापदादा बेहद के परिवार को देख रहे हैं। बेहद का बाप बेहद के परिवार को बेहद की याद-प्यार देते हैं।सदा श्रेष्ठ परिवार के नशे में रहने वाले प्रभु परिवार के महत्व को जान महान बनने वाले, सर्व प्राप्तियों के भण्डार श्रेष्ठ राज्य भाग्य प्राप्त करने वाले प्रभु रत्नों को याद-प्यार और नमस्ते।(ग्याना के अंकल और आंटी से) सर्विसएबुल बच्चों को बापदादा मिलन के साथ स्वागत कर रहे हैं। जितना पल-पल याद करते आये हो उसके रिटर्न में बापदादा नयनों की पलकों में समाए हुए बच्चों का स्वागत कर रहे हैं। एक बाप के गुण गाने वाले बच्चों को देख बापदादा भी बच्चों की विशेषता के गुण गाते हैं। निशदिन, निशपल, गीत गाते रहते हो ना। जब बच्चे गीत गाते तो बाप क्या करते? जब कोई अच्छा गीत गाता है तो सुनने वाले क्या करते हैं? न चाहते हुए भी नाचने लग जाते हैं। चाहे नाचना आवे या न आवे लेकिन बैठे-बैठे भी नाचने लग जाते हैं। तो बच्चे जब स्नेह के गीत गाते हैं तो बापदादा भी खुशी में नाचते हैं ना इसीलिए शंकर डांस बहुत मशहूर है। सेवा भी तो नाचना है ना। जिस समय सर्विस करते हो उस समय मन क्या करता है? नाचता है ना। तो सेवा करना भी नाचना ही है। अच्छाबापदादा सदा बच्चों की विशेष विशेषता को देखते हैं। जन्मते ही विशेष 3 तिलक बापदादा द्वारा मिले हैं। कौन से? ताज, तख्त तो हैं ही लेकिन 3 तिलक विशेष हैं। एक स्वराज्य का तिलक तो मिला ही है। दूसरा जन्मते ही सर्विसएबल का तिलक मिला। तीसरा जन्मते ही सर्व परिवार के, बापदादा के स्नेही और सहयोगीपन का तिलक। तीनों तिलक जन्मते ही मिले ना। तो त्रिमूर्ति तिलकधारी हो। ऐसे विशेष सेवाधारी सदा अपने को समझते हो। अनेक आत्माओं को उमंग - उत्साह दिलाने के निमित्त बनने की सेवा ड्रामा में मिली हुई है। अच्छा। जितना बच्चे बाप को याद करते हैं, उतना बाप भी तो याद करते हैं। सबसे ज्यादा अखण्ड अविनाशी बाप की याद है। बच्चे और कार्य में भी बिजी हो जाते हैं लेकिन बाप का तो काम ही यह है। अमृतवेले से लेकर सबको जगाने का काम शुरू करते हैं। देखो कितने बच्चों को जगाना पड़ता है और फिर देश-विदेश में, एक स्थान पर भी नहीं हैं। फिर भी बच्चे पूछते सारा दिन क्या करते!बच्चों के बाद फिर भक्तों को करते, फिर साइंस वालों को प्रेरणा देते। सभी बच्चों की देख-रेख तो करनी पड़े। चाहे ज्ञानी हैं, चाहे अज्ञानी हैं लेकिन कई प्रकार से सहयोगी तो हैं ना। कितने प्रकार के बच्चों की सेवा है। सबसे ज्यादा बिज़ी कौन हैं? सिर्फ अन्तर यह है, शरीर का बन्धन नहीं है। अभी कुछ टाइम तो आप सब भी बाप समान बनेंगे ही। मूलवतन में रहेंगे। यह भी आशा सभी को पूरी होगी। अच्छा-मधुबन निवासियों के साथ - मधुबन निवासियों की महिमा तो जानते ही हो। जो मुधबन की महिमा है वही मधुबन निवासियों की महिमा है। हर पल समीप साकार में रहना इससे बड़ा भाग्य और क्या हो सकता है। दर पर बैठे हो, घर में बैठे हो, दिल पर बैठे हो। मधुबन निवासियों को मेहनत करने की आवश्यकता नहीं, योग लगाने की आवश्यकता है क्या! योग लगा हुआ ही रहता है। लगे हुए को लगाने की आवश्यकता नहीं। स्वत:योगी, निरन्तर योगी। जैसे ट्रेन में इंजन लगी हुई है, सभी डिब्बे पट्टे पर हैं तो स्वत: चलते रहते हैं, चलाना नहीं पड़ता है। ऐसे आप भी मधुबन के पट्टे पर हो, इंजन लगी हुई है तो स्वत: चलते रहेंगे। मधुबन निवासी अर्थात् मायाजीत। माया आने की कोशिश करेगी लेकिन जो बाप की कशिश में रहते हैं वह सदा मायाजीत रहेंगे। माया की कोशिश दूर से ही समाप्त हो जायेगी। सेवा तो सभी बहुत अच्छी करते हैं। सेवा के लिए एक एग्जैम्पुल हो। कोई कहाँ भी चारों ओर सेवा में थोड़ा भी नीचे ऊपर करते हैं तो सभी मधुबन वालों का ही दृष्टान्त देते हैं। मधुबन में कितनी अथक सेवा प्यार से घर समझकर करते हैं, यह सभी मानते हैं। जैसे सेवा में सभी नम्बरवन हो, 100 मार्क्स ली हैं, ऐसे सब सब्जेक्ट में भी 100 मार्क्स चाहिए। आप लोग बोर्ड पर लिखते हो ना हेल्थ, वेल्थ, हैपीनेस तीनों ही मिलती हैं। तो यह भी सब सबजेक्ट में मार्क्स चाहिए। सबसे ज्यादा सुनते मधुबन वाले हैं। पहला-पहला ताज़ा माल तो मधुबन वाले खाते हैं। दूसरे तो एक टर्न में एक बारी विशेष ब्रह्मा भोजन खाते। आप तो रोज़ खाते। सूक्ष्म भोजन, स्थूल भोजन सब गर्म, ताजा मिलता है। अच्छा -नई तैयारी क्या कर रहे हो? घर को तो अच्छा प्यार से सजा रहे हो। मधुबन की यह विशेषता है, हर बार कोई न कोई नई एडीशन हो जाती है। जैसे स्थूल में नवीनता देखते, ऐसे चैतन्य में भी हर बार नवीनता देख वर्णन करें कि इस बार विशेष मधुबन में इस प्राप्ति की लहर देखी। भिन्न-भिन्न लहरें हैं ना। कभी विशेष आनन्द की लहर हो, कभी प्यार की, कभी ज्ञान के विशेषताओं की.. हरेक को यही लहर दिखाई दे। जैसे सागर की लहरों में कोई जाता तो लहराना ही पड़ता, नहीं तो डूब जायेगा। तो यह लहरें स्पष्ट दिखाई दें। इस कानफ्रेन्स में विशेष क्या करेंगे? वी.आई.पीज़. आयेंगे, पेपर वाले आयेंगे, वर्कशाप होंगी, यह तो होगा लेकिन आप सब विशेष क्या करेंगे? जैसे स्थूल दिलवाड़ा है उसकी विशेषता क्या है? हरेक कमरे की डिज़ाइन अलग-अलग वैरायटी है। हर कमरे की अपनी-अपनी विशेषता है। इसलिए यह मन्दिर सब मन्दिरों से न्यारा है। मूर्तियां तो औरों में भी होती हैं लेकिन इस मन्दिर में जहाँ जाओ वहाँ विशेष कारीगरी है। ऐसे चैतन्य दिलवाड़ा मन्दिर में भी हर मूर्तियों की विशेषता अपनी-अपनी दिखाई दे। जिसको देखें, उसकी एक दो से आगे विशेष विशेषता दिखाई दे। जैसे वहाँ कहते कमाल है बनाने वाले की। ऐसे यहाँ एक-एक की विशेषता की कमाल वर्णन करें। आप लोग इस बात की मीटिंग करो। कोई बड़ी बात नहीं है, कर सकते हो। जैसे सतयुग में देवतायें सिर्फ निमित्तमात्र टीचर द्वारा थोड़ा-सा सुनेंगे लेकिन स्मृति बहुत तेज़ होगी, याद करने की मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। जैसे सुना हुआ ही है, वह सिर्फ फ्रेश हो रहा है। मधुबन वालों के लिए हुआ पड़ा है। सिर्फ थोड़ा-सा दृढ़ संकल्प का इशारा है बस। संकल्प भी बहुत अच्छे-अच्छे करते हो लेकिन उसमें दृढ़ता को बार-बार अन्डरलाइन करो। अच्छा!

वरदान:- दिलाराम बाप की याद द्वारा तीनों कालों को अच्छा बनाने वाले इच्छा मुक्त भव l

जिन बच्चों की दिल में एक दिलाराम बाप की याद है वह सदा वाह-वाह के गीत गाते रहते हैं, उनके मन से स्वप्न में भी ''हाय'' शब्द नहीं निकल सकता क्योंकि जो हुआ वह भी वाह, जो हो रहा है वह भी वाह और जो होना है वह भी वाह। तीनों ही काल वाह-वाह है अर्थात् अच्छे ते अच्छा है। जहाँ सब अच्छा है वहाँ कोई इच्छा उत्पन्न नहीं हो सकती क्योंकि अच्छा तब कहेंगे जब सब प्राप्तियां हैं। प्राप्ति सम्पन्न बनना ही इच्छा मुक्त बनना है।

स्लोगन:- संस्कारों को ऐसा शीतल बना लो जो जोश वा रोब के संस्कार इमर्ज ही न हों।

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*Thought for Today*

'In this time, being Godly children, it is our duty to spread the vibrations of peace and healing powers. Practice.'

Prajapita Brahma Kumaris Ishwariya Vishwa Vidhyalaya

 (Godly Spiritual University)

Established by God, this is the World Spiritual University for Purification of Souls with the knowledge and RajaYoga taught by the Supreme Soul (God), giving his most beneficial advice. 

Established in 1936, by today has more than 8500 centres in around 140 countries. World transformation is taking place. Come and know .more

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