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आज की मुरली का सार 9 May 2019


Aaj ki Murli ka Saar - Today's Murli essence in Hindi. आज की मुरली का सार 9 May 2019. You can also listen today's murli (in Hindi & English)


“मीठे बच्चे - शिवबाबा वन्डरफुल बाप, टीचर और सतगुरू है, उसे अपना कोई बाप नहीं, वह कभी किसी से कुछ सीखता नहीं, उन्हें गुरू की दरकार नहीं, ऐसा वन्डर खाकर तुम्हें याद करना चाहिए”


Q- याद में कौन-सी नवीनता हो तो आत्मा सहज ही पावन बन सकती है?


A- याद में जब बैठते हो तो बाप की करेन्ट खींचते रहो। बाप तुम्हें देखे और तुम बाप को देखो, ऐसी याद ही आत्मा को पावन बना सकती है। यह बहुत सहज याद है, लेकिन बच्चे घड़ी-घड़ी भूल जाते हैं कि हम आत्मा हैं, शरीर नहीं। देही-अभिमानी बच्चे ही याद में ठहर सकते हैं।


Dharna


1) किसी भी एक्टर से रावण हषद (ईर्ष्या) करे, विघ्न डाले, त़ूफान में लाये तो उसे न देख अपने पुरूषार्थ में तत्पर रहना है क्योंकि हरेक एक्टर का पार्ट, इस ड्रामा में अपना-अपना है। यह अनादि ड्रामा बना हुआ है।


2) रावण मत पर ईश्वर की अमानत में ख्यानत नहीं डालनी है। सबसे ममत्व निकाल पूरा ट्रस्टी होकर रहना है।


Vardaan

बुराई में भी अच्छाई का अनुभव करने वाले निश्चयबुद्धि बेफिक्र बादशाह भव


सदा यह स्लोगन याद रहे कि जो हुआ अच्छा हुआ, अच्छा है और अच्छा ही होना है। बुराई को बुराई के रूप में न देखें। लेकिन बुराई में भी अच्छाई का अनुभव करें, बुराई से भी अपना पाठ पढ़ लें। कोई भी बात आये तो “क्या होगा” यह संकल्प न आये लेकिन फौरन आये कि “अच्छा होगा”। बीत गया अच्छा हुआ। जहाँ अच्छा है वहाँ सदा बेफिक्र बादशाह हैं। निश्चयबुद्धि का अर्थ ही है बेफिक्र बादशाह।


Slogan

जो स्वयं को वा दूसरों को रिगार्ड देते हैं उनका रिकार्ड सदा ठीक रहता है।


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