ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मुख्य चार विषय 

ब्रह्माकुमार व ब्रह्मकुमारियों द्वारा मुरली ज्ञान अमृत से अध्ययन करने वाले मुख्य 4 विषय निम्नलिखित हैं। 

ज्ञान के अर्थ है बोध। खुशी हमारे विवेक ( ज्ञान का गहन चिंतन ) पर आधारित है। बच्चों को ज्ञान दिया जाता है जिससे वो सही एवं गलत के अंतर को समझ सकें। दूसरे शब्दों में ज्ञान प्रकाश ही हमारे जीवन यात्रा एवं मुक्ति का मार्गदर्शन करता है। परमात्मा सत्य ज्ञान द्वारा सभी आत्माओं को स्व के प्रति जागृत करते हैं ,जिसे आत्मायें अज्ञानतावश विस्मृत कर चुकी हैं। परमात्मा निराकार है इसलिए वह सत्य ज्ञान मुरलियों के माध्यम से ब्रह्मा मुख द्वारा उचारते हैं। हम आत्मायें ज्ञान सागर बाप के बच्चे हैं परन्तु स्वस्मृति भूलने के कारण 5 विकारों ( काम,क्रोध,मोह,लोभ,अहंकार ) से घिर जाते हैं जो दुखों के कारण हैं  फिर हम परमात्मा को दुखों से मुक्ति के लिए पुकारते हैं। आत्माओं को ज्ञान किस प्रकार प्राप्त होता है? - मुरली क्या है?

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विकारों के संपूर्ण विनाश से ही आत्मा में ज्ञान व विवेक जागृत होता है।राजयोग अथवा राजयोग हम बच्चों के सामने परमात्मा ही प्रत्यक्ष करते हैं। परमात्मा से सीधे सम्बन्ध के द्वारा आत्मायें सम्पूर्ण पवित्र बनती हैं और जीवन मुक्ति को प्राप्त करती हैं। राजयोग में हम परमात्मा, जो कि ज्योति व शक्ति के बिंदुरूप है ,उस पर ध्यान लगाते हैं। हम स्वयं को भी परमपिता पमात्मा सामान ज्योति बिंदु के रूप में अनुभव करते हैं। यह बुद्धि योग है इसलिए इसमें अनुभव किया जाता है ,साक्षात्कार की अपेक्षा नहीं की जाती। राजयोग में हमें गहन अनुभूति होती है कि परमात्मा से प्रेम व शांति की किरणे हम तक पहुँच रही हैं। राजयोग आत्मा की अष्ट शक्तियों को जागृत करता है। राजयोग का विषय पूर्णतः गुप्त होता है अर्थात यदि आप योग में हैं तो बाह्य रूप से कोई भी समझ नहीं सकता। आप किसी को मुरली पढ़ते या पढ़ाते तो देख सकते हो परन्तु याद को इन नेत्रों द्वारा देखा नहीं जा सकता।

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"निरंतर अभ्यास हमें संपूर्ण बनता है " यह विषय सभी के द्वारा भलीभांति देखा जा सकता है। यह ज्ञान का जीवन में प्रयोग है। उदाहरण के लिए हमें ज्ञान है की हम आत्मा हैं परन्तु धारणा का अर्थ है उसी ज्ञान का स्वरुप बनना अर्थात देहीअभिमानी स्थिति में स्थित होना। इस स्थिति में सभी आत्मिक गुण- सुख,शांति,प्रेम,आनंद,पवित्रता,ज्ञान एवं शक्ति, हमारे प्रत्येक कर्म में दिखाई देते हैं। यह ईश्वरीय ज्ञान द्वारा लौकिक जीवन जीने का तरीका है। प्रत्येक आत्मा अपनी क्षमतानुसार ज्ञान को समझती व जीवन में धारण करती है। मुरली द्वारा ज्ञान समझा जाता है एवं विवेक बढ़ता है। जैसा कि ज्ञात है सूर्य अपना प्रकाश चारों ओर सामान रूप से फैलाता है उसी प्रकार परमात्मा भी अपना ज्ञान सभी को सामान रूप से देते हैं किन्तु प्रत्येक इसे अपनी अपनी क्षमतानुसार ग्रहण करता है। इसी ज्ञान को धारण कर हम लक्ष्मी और नारायण बनते हैं। यह गुणों की धारणा है।  गुण 7 प्रकार के होते हैं।

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जब एक आत्मा जागृत हो जाती है तो वह दीपक के सामान अन्य आत्माओं को भी प्रज्ज्वलित करती हैं। हम भाग्यवान आत्मायें हैं जो परमात्मा के द्वारा सत्य ज्ञान लेती हैं और इस ज्ञान अमृत के द्वारा विश्व की सेवा करती हैं। बाबा कहते हैं - यदि तुम बच्चे जागती ज्योत बन मुझसे वर्सा लेते हो,तो तुम्हारी जिम्मेवारी है कि अपने अन्य भाई बहनों को भी जगाओ और उनका भी भाग्य बनाओ।

दिन प्रतिदिन यह ज्ञान और भी साफ़ होता जा रहा है इसलिए जिन्होंने आरम्भ में अविश्वास किया ,वह भी वापस आ रहे हैं। ''ब्रह्मकुमारियों को प्रतिदिन मुरली में यही शिक्षा मिलती है कि सेवा स्व व विश्व ,दोनों के प्रति लाभदायक होती है'' - अव्यक्त बापदादा। जो अपने मन व बुद्धि को सदैव दूसरों की सेवा प्रति व्यस्त रखेगा वह लौकिक विघ्नो से दूर रहेगा। परमात्मा हमें जीवन जीने के सही मार्ग सिखलाते हैं। समस्त विश्व के उद्धार के लिए जीवन जीने का तरीका सर्वोत्तम होता है। विश्व सेवक बनने के लिए दिव्य गुण, सभी प्रति प्रेम, दया और साथ ही बेहद के वैराग्य की आवश्यकता होती है।

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सर्व प्रति ईश्वरीय सन्देश

मैं इस संगम युग के समय ( आत्मा व परमात्मा के मिलन का समय ) पुनः विकारी दुनिया को मिटा एक नयी दुनिया ( स्वर्ग ) की स्थापना करने के लिए आया हूँ। मैं तुम्हें सत्य ज्ञान देता हूँ जिससे तुम स्वराज्याधिकारी बनते हो। जब तुम मुझे याद करते हो तो मैं तुम्हें शक्ति प्रदान करता हूँ। इसलिए मीठे बच्चे ,इस पुरानी पतित दुनिया को भूल जाओ क्योंकि मैं तुम्हारे लिए सुख ,शांति की एक नयी दुनिया की स्थापना कर रहा हूँ जहाँ सभी सर्व गुण सम्पन्न व आत्माभिमानी स्थिति मे होंगे। वहां सभी न्यायपूर्ण होगा। वह एक सपूर्ण संसार होगा।

*Thought for Today*

'In this time, being Godly children, it is our duty to spread the vibrations of peace and healing powers. Practice.'

Prajapita Brahma Kumaris Ishwariya Vishwa Vidhyalaya

 (Godly Spiritual University)

Established by God, this is the World Spiritual University for Purification of Souls with the knowledge and RajaYoga taught by the Supreme Soul (God), giving his most beneficial advice. 

Established in 1936, by today has more than 8500 centres in around 140 countries. World transformation is taking place. Come and know .more

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Om Shanti Bhawan, 

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